वेकोली कर्मचारी राकेश नेरवटला की संदिग्ध मृत्यु मामले में आरोप-प्रत्यारोप तेज

 




वेकोली कर्मचारी राकेश नेरवटला की संदिग्ध मृत्यु मामले में आरोप-प्रत्यारोप तेज 

चंद्रपुर,( राज्य रिपोर्टर न्यूज ) : वेकोली चंद्रपुर क्षेत्र की नांदगांव खदान में कार्यरत कर्मचारी राकेश नेरवटला की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु ने एक बार फिर खान प्रबंधन और क्षेत्रीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं यह मामला अब केवल एक कर्मचारी की मृत्यु तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि कथित लापरवाही, गैर-जिम्मेदाराना रवैये और पूरे घटनाक्रम को दबाने की आशंका का प्रतीक बनता जा रहा है. 

प्राप्त जानकारी के अनुसार 11 जनवरी की रात्रि पाली में ड्यूटी के दौरान राकेश नेरवटला के पैर पर भारी कोयला गिर गया जिससे उन्हें गंभीर चोट आई, सहकर्मियों की मदद से उन्हें तत्काल वेकोली के क्षेत्रीय अस्पताल में भर्ती कराया गया ओर यहीं से इस पूरे मामले ने कई सवालों को निर्माण कर दिया. 

बताया जा रहा है कि घायल राकेश को 12 जनवरी की सुबह लगभग 7:30 बजे वेकोली के क्षेत्रीय अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया था लेकिन बड़ा सवाल यह है कि 17 जनवरी को उन्हें खदान में क्यों बुलाया गया जबकि मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार उस समय उनके पैर में पट्टी बंधी थी और डॉक्टरों ने उन्हें पूर्ण आराम की सलाह दी थी. 

सूत्रों का कहना है कि ऐसी स्थिति में घायल कर्मचारी को “इंज्यूरी ऑन ड्यूटी” का दर्जा देना अनिवार्य था इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों ने यह सुविधा क्यों नहीं दी? क्या यह मामला उजागर होने के डर से टाला गया, या फिर प्रबंधन ने पूरे प्रकरण को दबाने की कोशिश की? यह अब जांच का विषय बन चुका है. 

इस मामले में खान प्रबंधन के अनुसार 17 जनवरी को राकेश नेरवटला स्वयं अपने परिचितों के साथ खान प्रबंधक से मिलने पहुंचे थे और उन्होंने हल्के कार्य (लाइट जॉब) की मांग की थी लेकिन यह बात कई सवाल खड़े करती है जब डॉक्टर ने उन्हें आराम की सलाह दी थी और उनके पैर पर पट्टी बंधी थी तो आखिर वह घायल अवस्था में ड्यूटी की मांग करने क्यों पहुंचे?

इसी बीच एक और जानकारी सामने आई है सूत्रों के अनुसार खान प्रबंधक ने स्वयं राकेश को बुलाकर 10 दिन आराम करने की सलाह दी थी ,यदि यह सच है तो फिर घायल कर्मचारी का दोबारा खदान परिसर में आना और काम से जुड़ना कैसे संभव हुआ? यह विरोधाभास पूरे मामले को और अधिक संदिग्ध बना रहा है. 

सबसे गंभीर सवाल यह भी उठ रहा है कि खदान जैसे अत्यंत जोखिमपूर्ण कार्यस्थल पर बिना चिकित्सकीय रूप से “फिट” घोषित किए किसी कर्मचारी को काम पर लौटने की अनुमति कैसे दी गई? बताया जा रहा है कि चलने-फिरने में असमर्थ कर्मचारी को सुरक्षा प्रहरी (सिक्योरिटी गार्ड) जैसा दायित्व सौंप दिया गया क्या प्रबंधन ने सुरक्षा नियमों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया था?

इन तमाम सवालों के बीच यह स्पष्ट होता जा रहा है कि या तो प्रबंधन की कार्यप्रणाली में गंभीर खामियां हैं या फिर पूरे मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है एक कर्मचारी की जान चली गई, लेकिन जिम्मेदारी लेने के लिए कोई सामने नहीं आ रहा इससे यह आशंका और गहरा रही है कि कहीं किसी बड़े सच को छिपाने की कोशिश तो नहीं हो रही ? 

स्वर्गीय राकेश नेरवटला की संदिग्ध मृत्यु अब केवल एक हादसा नहीं बल्कि जवाबदेही और न्याय की मांग बन चुकी है पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच अत्यंत आवश्यक है ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सके. 

इस मामले से जुड़े अन्य चौंकाने वाले खुलासों के लिए पढ़ते रहें “राज्य रिपोर्टर न्यूज”की अगली विशेष रिपोर्ट




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