वेकोली के मॉनिटरिंग टीम पर उठ रहे सवाल, अवकाश के दिन फील्ड विजिट, सिर्फ कागजी खानापूर्ति?
चंद्रपुर,( राज्य रिपोर्टर न्यूज ) : वेकोली मुख्यालय द्वारा हाल ही में जारी एरिया मॉनिटरिंग कार्यक्रम ने अब अनेक प्रश्नों को निर्माण किया है मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी द्वारा खनन संवर्ग के महाप्रबंधक स्तर के अधिकारियों की अलग-अलग टीम गठित कर एरिया मॉनिटरिंग हेतु फील्ड विजिट का विस्तृत शेड्यूल जारी किया गया था जिसके अनुसार चंद्रपुर एरिया में मॉनिटरिंग टीम का पहला फील्ड विजिट 22 फरवरी को दर्शाया गया है जहाँ से विवाद की शुरुआत हुवी है।
चर्चा है कि 22 फरवरी को चंद्रपुर क्षेत्र में साप्ताहिक अवकाश था ऐसे में यह स्वाभाविक सवाल उपस्थित हुआ है कि अवकाश के दिन मुख्यालय से आए महाप्रबंधक स्तर के अधिकारी आखिर किस स्थल पर निरीक्षण करने पहुंचे? यदि क्षेत्रीय कार्यालय और खदानें नियमित रूप से बंद थीं, तो फील्ड विजिट की वास्तविकता क्या रही?
मामला यहीं तक सीमित नहीं है 22 फरवरी को चंद्रपुर क्षेत्र के अधिकारियों की एक निजी पार्टी आयोजित होने की भी जानकारी सामने आई है जिसमें क्षेत्र के अधिकांश अधिकारी उपस्थित बताए जा रहे हैं ऐसे में यह शंका और गहरा जाती है कि क्या निर्धारित फील्ड विजिट वास्तव में संपन्न हुई या केवल कागजी औपचारिकता निभाई गई? यदि अधिकारी क्षेत्र में मौजूद थे, तो निरीक्षण की कार्यवाही, बैठक , स्थल निरीक्षण और फोटोग्राप्स सोशल मीडिया पर सार्वजनिक क्यों नहीं किए जा रहे? ऐसी चर्चा है।
इस बीच सोशल मीडिया पर एक पत्र तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कोल इंडिया लिमिटेड की आनुषंगिक कंपनियों में वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ अधिकारियों की संख्या का उल्लेख किया गया है उक्त पत्र के आधार पर यह आरोप भी उभर रहा है कि चंद्रपुर क्षेत्र के मॉनिटरिंग हेतु आए अधिकारी स्वयं भी लंबे समय से एक ही कंपनी में कार्यरत हैं इससे पारदर्शिता, निष्पक्षता और प्रशासनिक निष्पादन की मंशा पर प्रश्नचिन्ह खड़े हो रहे हैं।
यदि मॉनिटरिंग का उद्देश्य व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करना है, तो स्वयं मॉनिटरिंग तंत्र की निष्पक्षता और विश्वसनीयता भी संदेह से परे होनी चाहिए वर्षों से एक ही कंपनी में कार्यरत अधिकारियों द्वारा की गई निरीक्षण प्रक्रिया कितनी स्वतंत्र और प्रभावी होगी, यह भी विचारणीय विषय है।
अब आवश्यकता है कि वेकोली मुख्यालय इस पूरे प्रकरण पर स्पष्ट और तथ्यों सहित आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करे। 22 फरवरी के फील्ड विजिट से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट, उपस्थिति विवरण, निरीक्षण बिंदु और प्रमाण सार्वजनिक किए जाएं, ताकि उठ रहे संदेहों का समाधान हो सके. यदि मॉनिटरिंग केवल कागजों तक सीमित रही, तो यह न केवल प्रशासनिक विश्वसनीयता पर आघात होगा, बल्कि कंपनी की साख पर भी गंभीर प्रभाव डालेगा।






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