प्रबंधन एवं अस्पताल के डॉक्टरों की लापरवाही से कर्मचारी की मृत्यु ? राकेश नेरवटला की मृत्यु मामले में नया खुलासा !
◾क्षेत्रीय प्रबंधन और अस्पताल व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए?
चंद्रपुर,( राज्य रिपोर्टर न्यूज ) : वेकोली चंद्रपुर क्षेत्र की नांदगांव खदान में कार्यरत राकेश नेरवटला की संदिग्ध मृत्यु ने एक बार फिर क्षेत्रीय प्रबंधन और अस्पताल व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं यह मामला केवल एक कर्मचारी की मृत्यु का नहीं बल्कि कथित लापरवाही, गैर-जिम्मेदाराना रवैये और कार्यस्थल सुरक्षा मानकों की खुली अनदेखी का प्रतीक बनता जा रहा है.
बताया जा रहा है कि 11 जनवरी की रात्रि पाली में ड्यूटी के दौरान स्वर्गीय राकेश नेरवटला के पैर पर भारी कोयला गिर गया जिससे उन्हें गंभीर चोट आई सहकर्मियों की मदद से उन्हें तत्काल वेकोली के क्षेत्रीय अस्पताल में भर्ती कराया गया ओर यहीं से घटनाक्रम ने चौंकाने वाला मोड़ ले लिया.
सूत्रों के अनुसार 11 जनवरी की सुबह 8 बजे से 12 जनवरी की सुबह 8 बजे तक ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक ने 12 जनवरी की सुबह लगभग 7:30 बजे घायल राकेश का केवल प्राथमिक उपचार कर एक्स रे करने की सलाह दी और अस्पताल से चले गए जिससे अब सवाल यह है कि 24 घंटे की ड्यूटी मे संबंधित डॉक्टर ने एक गंभीर रूप से घायल कर्मचारी को केवल प्राथमिक उपचार कर एक्स रे करने की सलाह देकर कैसे छोड़ा जा सकता है?
इसके बाद 12 जनवरी की सुबह ड्यूटी पर आए दूसरे डॉक्टर ने पूर्व चिकित्सक की उपचार पद्धति को आगे बढ़ाते हुए एक्स-रे कराने की सलाह दी और वे भी चले गए ओर जब डॉक्टर पुनः राउंड पर लौटे तो राकेश अपने बेड पर मौजूद नहीं थे वार्ड में उपस्थित कर्मचारियों से पूछताछ करने पर बताया गया कि मरीज की छुट्टी हो गई.
अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है पैर में पट्टी बंधे गंभीर रूप से घायल कर्मचारी को बिना पूर्ण उपचार के छुट्टी किसने दी? क्या डिस्चार्ज की कोई लिखित प्रक्रिया पूरी की गई? यदि नहीं तो यह किस स्तर की लापरवाही है?
मामला यहीं खत्म नहीं होता , घायल अवस्था में राकेश के दोबारा ड्यूटी पर लौटने की बात भी सामने आई है खदान जैसे जोखिमपूर्ण कार्यस्थल पर बिना चिकित्सकीय रूप से “फिट” घोषित किए किसी कर्मचारी को काम पर लौटने की अनुमति किस अधिकारी ने दी? और वह भी जो अच्छी तरह से चल नहीं सकता खड़ा नहीं हो सकता उसे सुरक्षा प्रहरी का कार्य ? क्या प्रबंधन ने सुरक्षा नियमों को ताक पर रख दिया?
इन तमाम सवालों के बीच यह स्पष्ट होता जा रहा है कि या तो अस्पताल प्रबंधन में गंभीर खामियां हैं या फिर पूरे मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है एक कर्मचारी की जान चली गई, लेकिन जिम्मेदारी लेने को कोई तैयार नहीं दिख रहा. परिवार शोक में डूबा है सहकर्मियों में आक्रोश है और प्रबंधन चुप्पी साधे हुए है क्या यह चुप्पी किसी बड़े सच को छिपाने की कोशिश है?
स्वर्गीय राकेश नेरवाटला की संदिग्ध मृत्यु अब केवल एक हादसा नहीं बल्कि जवाबदेही और न्याय की मांग बन चुकी है इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच आवश्यक है ताकि दोषियों को चिन्हित कर कड़ी कार्रवाई की जा सके.
इस मामले से जुड़े अन्य चौंकाने वाले खुलासों के लिए पढ़ते रहें “राज्य रिपोर्टर न्यूज” की अगली विशेष रिपोर्ट.







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