क्षेत्रीय अस्पताल में कार्यवितरण आदेश काग़ज़ों में, ज़मीनी हकीकत कुछ और!
चंद्रपुर,( राज्य रिपोर्टर न्यूज ) : वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के चंद्रपुर क्षेत्रीय अस्पताल में प्रशासनिक आदेशों और वास्तविक कार्यप्रणाली के बीच भारी विरोधाभास सामने आया है सुचारु कार्य संचालन के उद्देश्य से क्षेत्रीय चिकित्सा अधिकारी द्वारा 1 अगस्त 2025 को कर्मचारियों के कार्यदायित्वों का पुनर्वितरण आदेश जारी किया गया था, लेकिन हकीकत में यह आदेश केवल फाइलों तक ही सीमित रह गया.
उक्त आदेश के अनुसार मुख्य फार्मासिस्ट गुलाब सूर्यवंशी को ओपीडी दवा वितरण एवं स्थानीय बिलों की जिम्मेदारी दी गई थी, जबकि के. मोहन राव को औषध भंडार (स्टोर) और अस्पताल संपत्ति अभिलेखों का संधारण सौंपा गया था. वहीं फार्मासिस्ट मोहिनी राजुरकर को रेफरल सेक्शन, SAP और एम्पैनल्ड अस्पतालों के बिलों का अतिरिक्त कार्य तथा राकेश कुरेकर को किचन कार्य और ओपीडी डिस्पेंसिंग रूम की जिम्मेदारी दी गई थी आदेश में यह भी उल्लेख था कि आवश्यकता पड़ने पर कार्य आवंटन में बदलाव किया जा सकता है और आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा.
लेकिन 5 फरवरी 2026 को इस कथित कार्यवितरण व्यवस्था की पोल उस वक्त खुल गई जब चंद्रपुर की औषध निरीक्षक नालंदा उरकुडे और सहायक आयुक्त सुहास सावंत ने अस्पताल के औषध भंडार की औचक जांच की.
जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए औषध भंडार में के. मोहन राव के साथ मोहिनी राजुरकर कार्यरत पाई गईं, जबकि वितरण कक्ष में गुलाब सूर्यवंशी और राकेश कुरेकर मौजूद थे. निरीक्षण के दौरान गुलाब सूर्यवंशी द्वारा दवा वितरण किए जाने की भी स्पष्ट पुष्टि हुई.
सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब कार्यवितरण का स्पष्ट आदेश जारी किया गया था, तो फिर महीनों तक उसका पालन क्यों नहीं हुआ? क्या अस्पताल में प्रशासनिक आदेश केवल दिखावे के लिए जारी किए जाते हैं? और क्या जिम्मेदार अधिकारी इस अनियमितता से अनजान थे या जानबूझकर आंख मूंदे बैठे रहे?
यह मामला अब सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही तक सीमित नहीं रह गया है यह मरीजों की सुरक्षा , औषधि नियमों के उल्लंघन और जवाबदेही तय करने से सीधे जुड़ा हुआ है.
क्या इस गंभीर अनियमितता पर क्षेत्रीय प्रबंधन द्वारा ठोस और पारदर्शी कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबाकर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?






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